अबुआ आवास योजना (झारखंड)
अगर PM Awas Yojana Gramin की केंद्रीय सूची से आपका परिवार किसी कारण छूट गया है, तो झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना आपके लिए है। यह 100% राज्य-वित्तपोषित योजना है, जो PMAY-G से अलग तरीके से काम करती है।
अबुआ आवास योजना क्या है
अबुआ आवास योजना झारखंड सरकार की एक राज्य-स्तरीय आवास योजना है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 15 अगस्त 2023 को मोरहाबादी मैदान से की थी। “अबुआ” शब्द का मतलब स्थानीय (मुंडारी) भाषा में “अपना” होता है – यानी “अपना आवास योजना”। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) में लाभार्थियों का चयन SECC 2011 डेटा और केंद्रीय मानकों के आधार पर होता है, जिसके चलते झारखंड में भी कई गरीब और बेघर परिवार छूट गए। ऐसे ही परिवारों के लिए अबुआ आवास योजना शुरू की गई। झारखंड अकेला राज्य नहीं है जिसने यह कदम उठाया – उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों ने भी PMAY-G से छूटे परिवारों के लिए अपनी समान योजनाएं शुरू की हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए झारखंड ग्रामीण विकास विभाग ने 4.5 लाख घरों का अंतरिम लक्ष्य तय किया है, जो कुल 8 लाख घरों के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है। इस सूची को अंतिम रूप ग्राम सभा की बैठक में दिया जाता है।
PMAY-G और अबुआ आवास योजना में फर्क
अबुआ आवास योजना के लिए कौन पात्र है
इस योजना के तहत पात्रता उन्हीं परिवारों को दी जाती है जो PMAY-G की केंद्रीय सूची से बाहर रह गए हों, और झारखंड के मूल निवासी हों।
- बेघर परिवार, जिनके पास कोई मकान नहीं है
- कच्चे या जर्जर मकान में रहने वाले परिवार
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवार
- झारखंड राज्य के मूल निवासी (डोमिसाइल) परिवार
- परिवार को पहले से PMAY-G में मकान स्वीकृत हो चुका है
- परिवार के पास पहले से पक्का मकान मौजूद है
- परिवार झारखंड का मूल निवासी नहीं है
आवेदन कैसे करें
अबुआ आवास योजना PMAY-G या राज्य की अन्य योजनाओं से एक बड़े मामले में अलग है – इसमें खुद से ऑनलाइन आवेदन जमा करने की सुविधा नहीं है। आवेदन सिर्फ “आपकी सरकार, आपके द्वार” कैंप के जरिए, मौके पर जाकर ही किया जा सकता है।
अपनी पंचायत में लगने वाले “आपकी सरकार, आपके द्वार” कैंप की तारीख ग्राम पंचायत सचिव से पूछें
कैंप में मौजूद अधिकारियों से आवेदन फॉर्म मुफ्त में लें, या पोर्टल से PDF डाउनलोड करें
जरूरी जानकारी भरकर कैंप में मौजूद अधिकारी को जमा करें, प्राप्ति रसीद जरूर लें
आवेदन ग्राम सभा की बैठक में सत्यापित होकर अंतिम सूची में शामिल होता है
सूची में अपना नाम कैसे देखें
अबुआ आवास योजना का आधिकारिक पोर्टल (aay.jharkhand.gov.in) फिलहाल आम नागरिकों के लिए सिर्फ शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है – सूची या आवेदन-स्थिति ऑनलाइन खुद चेक करने का फीचर अभी उपलब्ध नहीं है (भविष्य में जोड़े जाने की बात कही गई है)।
₹2 लाख के अलावा और क्या-क्या मिलता है
मुख्य निर्माण राशि के साथ, PMAY-G जैसी ही कुछ अतिरिक्त सुविधाएं अबुआ आवास योजना में भी जुड़ती हैं।
₹2 लाख की मुख्य राशि कब मिलती है
आवास स्वीकृत होने और प्लिंथ स्तर तक निर्माण पूरा होने पर
दीवारों का निर्माण एक निश्चित स्तर तक पूरा होने पर जारी होती है
छत/लिंटल स्तर तक निर्माण पूरा होने पर जारी होती है
मकान पूरी तरह बनने और अंतिम सत्यापन के बाद बाकी पूरी राशि जारी होती है
शिकायत कैसे दर्ज करें
आधिकारिक पोर्टल पर आम नागरिकों के लिए फिलहाल यही मुख्य ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है।
ठगों से सावधान रहें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“अबुआ” शब्द का क्या मतलब है?
“अबुआ” मुंडारी भाषा का शब्द है, जिसका हिंदी में मतलब है “अपना”। इसलिए योजना का भाव है “अपना घर, अपनी योजना”।
क्या मकान पति के नाम पर पंजीकृत हो सकता है?
नहीं, अबुआ आवास योजना में मकान का पंजीकरण परिवार की महिला के नाम पर करना अनिवार्य है। यह योजना की एक सख्त शर्त है।
1 साल में घर नहीं बना पाए तो क्या होगा?
निर्माण पूरा करने की समयसीमा 1 वर्ष रखी गई है। समय पर पूरा न होने की स्थिति में क्या नियम लागू होते हैं, इसकी सटीक जानकारी अपने प्रखंड कार्यालय से जरूर लें, क्योंकि स्थानीय परिस्थिति के अनुसार यह अलग हो सकता है।
मनरेगा वाली ₹25,840 राशि कैसे मिलती है, अलग से आवेदन करना पड़ता है?
यह राशि मनरेगा (अब VB-G RAM G) के तहत निर्माण कार्य में लगने वाली मजदूरी के बदले मिलती है, जो अबुआ आवास योजना से जुड़ी होने पर अपने आप जुड़ जाती है – इसके लिए अलग से आवेदन की जरूरत सामान्यतः नहीं पड़ती।
सहायता कहां से लें
| ग्राम पंचायत सचिव | कैंप की तारीख और सूची में नाम की जानकारी के लिए |
| प्रखंड कार्यालय | आवेदन, निर्माण-समयसीमा और शिकायत के लिए |
| आधिकारिक पोर्टल | aay.jharkhand.gov.in – ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए |
PMAY-G सूची भी जांच लें
पहले पक्का कर लें कि आपका नाम केंद्रीय PMAY-G सूची में तो नहीं है – फिर राज्य योजना की तरफ बढ़ें।